Tuesday, December 14, 2010

लय, ताल छन्द हो तुम.............

लय, ताल, छन्द हो तुम,
कविता स्वच्छन्द हो तुम।
समीर मलय-मन्द हो तुम,
जीवन-आनन्द हो तुम।
नील वितान हो तुम,
नूतन विहान हो तुम।
पुहुप-मकरन्द हो तुम,
जीवन-आनन्द हो तुम।
तुम जब हँसती हो,
सरिता बहती है.....
अठखेलियों की नादों की।
सावन की भादों की।
मिट जाती हैं
सारी अनुभूतियाँ
दुःख, चिन्ता
और अवसादों की।।

4 comments:

Sunil Kumar said...

भावनात्मक अभिव्यक्ति

anjana said...

nice..

ममता त्रिपाठी said...

मिट जाती हैं
सारी अनुभूतियाँ
दुःख, चिन्ता
और अवसादों की।।

बहुत सुन्दर एवं हृदयस्पर्शी प्रस्तुति है। लय भी मधुर है।

Richa P Madhwani said...

bahut badiya