Tuesday, December 28, 2010

कैसा नववर्ष?


इस कड़कती ठण्ड में
कैसा नववर्ष?
सिसकियों का
खुशी से
कैसा आकर्ष?
मानव का
प्रकृति से
घोरतम संघर्ष?
मृत्यु का
जिजीविषा से
सनातन विमर्श।
फिर..........
इस कड़कती ठण्ड में
कैसा नववर्ष?

6 comments:

Machine Translation said...

bahut khub likhaa hai.

Mukesh Kumar Mishra said...

आप मेरे ब्लॉग पर आये और उत्साहवर्धन किया, बहुत बहुत धन्यवाद प्रकाश जी....

avadhesh said...

kadakti thand me bhi vaisa hi praffulit navvarsh, pradarshit kr raha manav ki jijivisha ka prakarsh... karen iska utsahit svagat, sabke liye shubh ho ye navvarsh.....

Anonymous said...

क्या बात है ....
मार्कंडेय पाण्डेय

teesarinazar said...

क्या बात है ....
मार्कंडेय पाण्डेय

naimishika said...

good ... very good