Friday, July 31, 2020

सकारात्मकता : यमुना धर त्रिपाठी "पिंकू"

हो ध्येय पथ पर अग्रसर,
प्रतिदिन-प्रतिपल-प्रतिप्रहर,
आलोचना को करके सहन,
सघन वन को बना उपवन,
सतत-अनथक-अनहद श्रम,
अवनत हो या उन्नत जीवन,
संग्राम-सामना उलझन से,
विपदा, संकट और मिश्रण से,
निंदा-प्रवाद का करके त्याग,
चिर-निद्रा को तोड़ जाग,
नैतिकता के पथ पर चलकर,
सहकर कष्ट, अग्नि में तपकर,
स्वयं प्रफुल्लित, आनंदित हो,
वसुधैव-कुटुम्बकम् का बीज बो,
भूत-भविष्य का मंथन छोड़,
बाधाओं को तोड़-मरोड़,
आगे बढ़ना, बढ़ते रहना,
बढ़ते रहना, नहीं थकना,
आगे ही बढ़ते जाना है।
जीवन को धन्य बनाना है।।

-यमुना धर त्रिपाठी "पिंकू"
जुलाई अंक

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