"काव्यरचना" का प्रथम प्रिंट संस्करण (with ISBN) प्रकाशित होने जा रहा
है……
एक रचनाकार अपनी पाँच रचनाएं प्रेषित कर सकता है......रचना भेजने की अन्तिम तिथि: १५ दिसम्बर २०१३
email- kavyarachana21@gmail.com
काव्यरचना में प्रकाशन हेतु रचनाएं आमंत्रित हैं । इन रचनाओं को पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित किया जायेगा । कृपया अपनी रचना kavyarachana21@gmail.com पर ईमेल करें।
चिढ़ाने का सा भाव
सपनीली आँखों से
देख कर
मैं अपने को पाता हूँ
आधा अधूरा
यह खालीपन …
जाने क्यों ?
ढूढंता हूँ
कुछ पाने के लिये
पर हाथ बढ़ा कर भी
रोक नहीं पाता
फिसलते क्षण;
विरान दिल को
डूबा देती हो अथाह सागर में
तुम्हारे धनुष-बाण घुस आते हैं -
दिल-दिमाग की तंत्रियां झंझोड़ कर
नग्न विचारों को एक झटका देकर
अनकहे भावों की बखिया उधेड़ कर
दे देती हो
एक तिनके का सहारा
जिसका आशय समझ नहीं पाता
मौन वार्ता सुन नहीं पाता
कुछ जान नहीं पाता
सिवा इसके कि -
आकाश से दुधिया चांदनी
जब रिसती हुई गीरती है
धरती के दामन पर
तो यह मदमस्ती बरगलाती
प्रलोभन देती
इसकी लहलहाती फसल
थामे हुये जो तुम खड़ी हो
यह तुम्हारे जिस्म से निकलती
बुलन्द आवाज है
रूह से निकलता
संगीत है।
सितम्बर अंक
हरिहर झा
Melbourne
Australia